पिछड़ा वर्ग आरक्षण पर आय बिहार के मोदी का बड़ा बयान

आरक्षण अपने देश की सियासत का सबसे गर्म मुद्दा है। बिहार में कई दसक से वर्ग विशेष कंट्रोल में सत्ता रही है तो ऐसा होना चाहिए ही।

देश के अल्पसंख्यक सवर्ण समुदाय को कभी पसंद नहीं है कि वर्ण व्यवस्था के करण पिछड़े वर्गों के लोगों को भी न्याय मिले । शायद यही कारण रहा होगा मंडल कमीशन लोगू करते समय ब्राह्मणों के सबसे सक्रिय गर्मतंत्र संगठन आर एस एस ने विरोध प्रदर्शन किया और सड़कों पर हड़कंप मचाया।

 

आरक्षण से जुड़ा ताजा मामला यह है कि भाजपा के वरिष्‍ठ नेता और राज्यसभा सदस्य सुशील मोदी ने इस पर बड़ा बयान दिया है। उन्‍होंने आरक्षण से जुड़े मामले में सर्वोच्‍च न्‍यायालय के फैसले से असहमति जताई है और केंद्र सरकार से संविधान में संशोधन करने की मांग की है।

पिछड़े वर्गों की आरक्षण राज्य सरकारों की हाथ से निकल जाऐ।

सुशील मोदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की मंशा, अटार्नी जनरल की बहस और सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्रालय के शपथपत्र के विपरीत संविधान के 102वें संशोधन की व्याख्या कर फैसला दिया है। इससे सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के लिए पिछड़े वर्गों की पहचान व सूची तैयार करने के अधिकार से राज्य वंचित हो जाएंगे।

 

मंडल कमीशन की रिपोर्ट में क्या था?

मालूम हो कि मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू होने के बाद केंद्र सरकार की नौकरियों व शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण के लिए जहां केंद्र सरकार पिछड़ों की सूची तैयार करती थी वहीं राज्यों को भी राज्य की नौकरियों में आरक्षण देने के लिए अपने स्तर से पिछड़ों की पहचान व सूची तैयार करने का अधिकार था।

पिछड़े वर्गों की पहचान में राज्‍य सरकारों की भूमिका घटेगी

सुशील मोदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की मंशा, अटार्नी जनरल की बहस और सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्रालय के शपथपत्र के विपरीत संविधान के 102वें संशोधन की व्याख्या कर फैसला दिया है। इससे सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के लिए पिछड़े वर्गों की पहचान व सूची तैयार करने के अधिकार से राज्य वंचित हो जाएंगे।

आरक्षण कियू ?

भारत में आर्यों का आगमन हुआ तो आर्य ने मूलवासी भारत के लोगों को शान्त सोभाव का पाया जिसे शड़ियंत्र से इतना कुचला कि इन्हें आर्थिक , सामाजिक और सांस्कृतिक , शेक्षिक व राजनीतिक स्तर में हाशिए पर धकेल दिया
देश की आज़ादी के बाद इन लोगों की दय्यीन इस्थिति की समीक्षा अंग्रेजों और न्याय प्रेम नेताओं ने की और एक लंबी लड़ाई के बाद संविधान में आरक्षण का प्रावधान किया गया था।

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