कदवा विधानसभा से टिकट ना मिलने पर रो पड़े चंद्र भूषण ठाकुर लड़ सकते हैं निर्दलीय चुनाव।

कटिहार कादवा
कदवा विधानसभा सीमांचल का सबसे बड़ा विधानसभा है इस विधानसभा में लगातार बीजेपी के नेता और बांग्लादेशी नागरिक भोला राय विधायक रह चुके हैं एक मर्तबा मूलनिवासी प्रोफेसर उस्मान गनी भी विधायक रहे उसके बाद निर्दलीय उम्मीदवार हेमराज सिंह लालू के पीरियड में विधायक रहे उसके बाद जलील एमएलए यहां से विधायक रहे।
2015 का विधानसभा इलेक्शन में
पिछली बार गठबंधन के तरफ से उम्मीदवार डॉक्टर शकील खाते और एनडीए गठबंधन के तरफ से उम्मीदवार चंद्र भूषण ठाकुर थे चंद्र भूषण ठाकुर को अपने क्षेत्र भ्रमण ना करने की वजह से हार का सामना करना पड़ा डॉक्टर शकील खान उसके खिलाफ भारी मतों से विजय प्राप्त की जबकि दोनों कदवा के बाहर के हैं।
कल शाम जब एनडीए ने अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की और उसमें चंद्र भूषण ठाकुर के नाम नहीं शामिल किए गए उनकी जगह पर जदयू के उम्मीदवार को खड़ा किया जाना तय पाया तो चंद्र भूषण ठाकुर रो पड़े और चेतावनी भी दे डाली कि मैं निर्दलीय उम्मीदवार की के तौर पर कटिहार और कदवा दोनों जगह से चुनाव लड़ लूंगा
आपको पता है किन सामान सीटों में आखिर क्यों नहीं समाज का दबा कुचला परिवार से आया हुआ व्यक्ति खड़ा हो पाता है और जीत हासिल कर पाता है आखिर यह लोग हैं कौन जो हमेशा दबे कुछ लोगों की आवाज दबा दे रहते हैं और उनके हक को खा जाते हैं।
2020 का चुनावी बिगुल फूंका जा चुका है इस बार के विधानसभा इलेक्शन में कई पार्टियों ने कई पार्टियों के साथ मिलकर गठबंधन बनाई है इसमें प्रमुख दो पार्टियां हैं यूपीए और एनडीए गठबंधन
इसके अलावा पप्पू यादव ने प्रॉपर्टी प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक एलाइंस के नाम पर एसडीपीआई भीम आर्मी और कई छोटी पार्टियों के साथ एलाइंस किया है वही एम आई एम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ने भी योगेंद्र यादव उपेंद्र कुशवाहा और मायावती के साथ एक गठबंधन किया जिनका मुख्य मुद्दा इंसाफ है और वह बिहार के लोगों के इंसाफ की गुहार लगा रहे।
सभी पार्टियां अपने भक्तों के साथ इलेक्शन में उतरेगी अब जनता देखना चाहती है की जीत किसकी होगी

कटिहार और कदवा दोनों जगहों से निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं, बीजेपी के बागी नेता, चंद्रभूषण ठाकुर |

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