आज ही के दिन जन्मे थे करोड़ों पिछड़ों के तकदीर बदलने वाले नेता बीपी मंडल

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कौन जानता था कि 25 अगस्त 1918 के बनारस के भूमि पर एक ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानी मंडल कमीशन के जनक ,दबे, कुचले, शोषित ,प्रताड़ित ,पिछड़ा का नायक स्व: बी पी मंडल साहब जन्म लेंगे! जिनके कड़ी संघर्ष की बदौलत मंडल आयोग की रिपोर्ट तैयार करने के लिए पूरे देश का भ्रमण कर देश की 3 हजार 7 सौ 43

जो शोषित ,वंचित, प्रताड़ित, दबे कुचले पिछड़ी जातियों का मुख्यधारा में आने का मौका मिलेगा

मगर अभी भी मंडल कमीशन की 40 से ज्यादातर सिफारिशों पर अब तक अमल नहीं हुआ है
उनकी अध्यक्षता में लिखी गई दूसरे पिछड़ा वर्ग आयोग, जिसे मंडल कमीशन के लोकप्रिय नाम से जाना जाता है, की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार की नौकरियों में पिछड़े वर्गों को 27 परसेंट आरक्षण मिला. इसी आयोग की एक और सिफारिश के आधार पर केंद्रीय शिक्षा संस्थानों में दाखिलों में भी पिछड़े वर्गों को 27 परसेंट आरक्षण दिया गया. इस आयोग की 40 में से ज्यादातर सिफारिशों पर अब तक अमल नहीं हुआ है. अगर भविष्य में कोई सरकार इस दिशा में काम करती है, तो इससे पिछड़ों का भला होगा.
क्या है मंडल कमीशन की रिपोर्ट?
मंडल कमीशन की रिपोर्ट भारत में सामाजिक लोकतंत्र लाने और 52 फीसदी ओबीसी आबादी को राष्ट्र निर्माण में हिस्सेदार बनाने की आजादी के बाद की सबसे बड़ी पहल साबित हुई, जिससे इन वर्गों के लाखों लोगों को नौकरियां मिलीं और शिक्षा संस्थानों में दाखिला मिला. इससे पिछड़े वर्गों की भारतीय लोकतंत्र में आस्था मजबूत हुई और उनके अंदर ये भरोसा पैदा हुआ कि देश के संसाधनों और अवसरों में उनका भी हिस्सा है.

उनकी अध्यक्षता में लिखी गई दूसरे पिछड़ा वर्ग आयोग, जिसे मंडल कमीशन के लोकप्रिय नाम से जाना जाता है, की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार की नौकरियों में पिछड़े वर्गों को 27 परसेंट आरक्षण मिला. इसी आयोग की एक और सिफारिश के आधार पर केंद्रीय शिक्षा संस्थानों में दाखिलों में भी पिछड़े वर्गों को 27 परसेंट आरक्षण दिया गया. इस आयोग की 40 में से ज्यादातर सिफारिशों पर अब तक अमल नहीं हुआ है. अगर भविष्य में कोई सरकार इस दिशा में काम करती है, तो इससे पिछड़ों का भला होगा.

मंडल कमीशन की रिपोर्ट भारत में सामाजिक लोकतंत्र लाने और 52 फीसदी ओबीसी आबादी को राष्ट्र निर्माण में हिस्सेदार बनाने की आजादी के बाद की सबसे बड़ी पहल साबित हुई, जिससे इन वर्गों के लाखों लोगों को नौकरियां मिलीं और शिक्षा संस्थानों में दाखिला मिला. इससे पिछड़े वर्गों की भारतीय लोकतंत्र में आस्था मजबूत हुई और उनके अंदर ये भरोसा पैदा हुआ कि देश के संसाधनों और अवसरों में उनका भी हिस्सा है.

मंडल कौन सी जाती है ?

धानुक (अंग्रेजी: Dhanuk), एक जातीय समूह है जिसके सदस्य बांग्लादेश , भारत और नेपाल में पाए जाते हैं। भारत में धानुक मूलतः बिहार , झारखण्ड , त्रिपुरा , पश्चिम बंगाल राज्यों में विभिन्न नामों / जातियों से जाने जाते हैं। उन्हें पिछड़े जाति का दर्जा प्रदान किया गया है ।

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