किस कारण लालू के लिए शहाबुद्दीन लक्ष्मण बने रह ?

लालू को CM भले ही देवीलाल ने बनवाया हो, लेकिन उसको CM बनाए रक्खा शहाबुद्दीन ने। वो stand वाला आदमी था, उसने जो कहा, वो करा। ना उसमे ज्यादा राजनैतिक कुटिलता वाली समझ थी।

अभी जब नितीश CM बना तो मीडिया ने शहाबुद्दीन से नितीश के बारे में पूछा, उसने कहा- ये मेरा नेता नहीं है, मेरा नेता तो लालू है। उसी वक्त नितीश ने शहाबुद्दीन की जमानत केंसिल करवा के दुबारा जेल में डलवा दिया।

शहाबुद्दीन पे हत्याओं के मुकदमे थे, बिहार का वो दौर जिसने देखा सुना हो वो समझ सकता है। ब्रह्मेश्वर मुखिया, भुटकन सुक्ला, राजन तिवारी, आनंद मोहन, अनंत सिंह, सूरजभान सिंह जैसे लोग गांवों में घुसकर मौत का खेल खेलते थे और बूढ़ों बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक को बेरहमी से मार डालते थे। वे सब आम जनता के दुश्मन थे और शहाब इन दुश्मनों का दुश्मन।
इन लोगों के नाक में नथ डाला तो ये मुकदमे कमाए थे शहाबुद्दीन ने।

अहीर और मुसलमान ही वहां अत्याचार के खिलाफ बोलता है। आज से 3 दिन पहले शहाबुद्दीन एकदम स्वस्थ था, बीजेपी को दिल्ली का चार्ज मिला और ये हो गया। कहानीकारों को पता है ये कौमें एक रहीं तो राज अपने आसपास ही रक्खेंगी तो कथाकारों ने इन दोनों कौमों को लड़ाने के लिए तरह तरह की कहानियां चलाई। इनके मन में खटास पैदा करके वो अपने मंसूबों में काफी कामयाब भी हो गए हैं।

सब जानते हैं लालू के साथ ऐसा हो जाता तो शहाबुद्दीन ही नहीं, आम मुसलमान भी अपनी जान पे खेल जाता, लेकिन शहाब के साथ ये हुआ और शहाब के लड़के के साथ खड़ा तक होने भी कोई नहीं आया।

लालू के लड़कों को ये बात अच्छे से समझ जानी चाहिए कि बिना तेवर वाला नेता बिहार के अहीरों को पसंद नहीं आता।

दीनदलाल अस्पताल के मुर्दाघर के भाहर कमर पे हाथ रक्खे खड़ा शहाबुद्दीन का लड़का दिल्ली में अपने पिता के शव को लेने के लिए दिन भर परेशान रहा लेकिन उसे राजद के सदस्य से अध्यक्ष तक किसी भी व्यक्ति का मदद तो दूर तिक्रिया भी न मिला।
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