लॉकडाउन का मारा, डूबते को तिनके का सहारा! लोकडाउन में जान कैसे बचे हमारे

लॉकडाउन का मारा, डूबते को तिनके का सहारा!

कटिहार। (अहमद हुसैन कासमी) जब से कोरोना महामारी ने हमारे प्यारे देश भारत पर प्रहार किया है, तब से वहां पर चिंता और विनाश का माहौल है हर दिन हम किसी की मरने की नई कहानियां सुनते हैं।

 

कहीं इंजेक्शन की कमी है तो कहीं ऑक्सीजन की कालाबाजारी की समस्या है कहीं कब्रिस्तान में मृतकों को दफनाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है और कहीं श्मशान में घंटों इंतजार करना पड़ता है पिछले कई दिनों से आज़मनगर के युवा “डूबते को तिनके का सहारा ” जैसी मशहूर कहावत को सच कर दिखा रहे हैं। उन विधवाओं को राशन पहुँचा रहें हैं जिनके चूल्हे लॉकडाउन की वजह से ठंडे पड़ चुके हैं।

 

आजमनगर के नेक दिल नोजवान उन बेसाहारा लोगों राशन का वितरण किया ताकि गरीब भूक न मरे ।

 

ये सारा काम लेखक शादाब वारसी के नेतृत्व में हुआ जिसमें मुख्य रूप से शाह फैसल, नेहाल, रेहान, नाहिद, जुम्मन, रबीऊल, गौसुल जैसे ऊर्जावान युवाओं ने मेहनत की!

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