RSS प्रमुख मोहन भागवत राष्ट्रपति पद के दौड़ में सबसे आगे: अगले राष्ट्रपति के तौर पर दिखे जाएंगे मोहन भागवत

RSS प्रमुख मोहन भागवत राष्ट्रपति पद के दौड़ में सबसे आगे
खेल अब शुरू हो गया है हिंदू राष्ट्र के पीछे ब्राह्मण राज का

क्या मतलब है योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाये जाने के ?
आदित्यनाथ कट्टर हिंदुत्व का चेहरा है। मतलब हिन्दूराष्ट्र का प्रतीक।
RSS का 90 साल पुराना एजेंडा, हिन्दू राष्ट्र की स्थापना।
क्या है हिन्दू राष्ट्र ?
मनुस्मृति के अनुसार शासन का चलाना ही हिन्दू राज है। मतलब संविधान में बदलाव और उसे कमजोर करने की और पहला कदम है आदित्यनाथ।
आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने के पीछे बहुत बड़ी योजना है। इससे हिंदुओं का ध्रुवीकरण होगा और मुस्लिमों,दलितों और आदिवासीयों को कमजोर किया जायेगा। आदित्यनाथ का चेहरा कट्टर हिंदुओं को एक साथ लाएगा और जोड़े रखेगा। दूसरी तरफ मोदी उदारवाद का झूठा चोला ओढ़कर हर वर्ग को अपने साथ जोड़ने का नाटक जारी रखेगा। मौर्य को उपमुख्यमंत्री बनाया जाना इसी योजना का हिस्सा है।
मोदी का यह नाटक तब तक जारी रहेगा जब तक मुसलमान, दलित और आदिवासी बिलकुल टूट नहीं जाते, बिलकुल कमजोर नहीं हो जाते। इसमें कई साल भी लग सकते हैं, कोई आजकल में नहीं होने वाला। दलित और आदिवासी आंदोलनों को ख़त्म किया जायेगा और विपक्ष को भी उभरने नहीं दिया जाएगा।
आदित्यनाथ कट्टर हिंदुओं को BJP के साथ जोड़े रखने के काम आएगा और मोदी विकास के नाम पर बचे लोगों को अपने साथ जोड़कर BJP को सबसे शक्तिशाली बनाने का काम जारी रखेगा।
वैसे यह सिर्फ एक दिखावा होगा, लोगों को मूर्ख बनाये रखने के लिए कि यहाँ लोकतंत्र चल रहा है, लोग अपने वोट से BJP को चुन रहे हैं। लेकिन असली काम करेगी EVM, जिसका उदाहरण अभी UP चुनाव में देखने को मिला। लोग सोचते रहेंगे की मुस्लिम ने BJP को वोट दिया, दलित और आदिवासी BJP के साथ हैं और पूरे भारत का साथ BJP को है।
दरअसल BJP सत्ता में लोगों को उल्लू बनाकर बने रहेगी लोगों ताकि कोई बगावत ना हो जाए, लोग विरोध में ना उतर आएं।
इधर दलितों को भगवान् और कर्मकांडों में उलझा कर ब्राह्मणवाद की नींव मजबूत की जाएगी, दलित और आदिवासी भी अब जमकर जय श्री राम करेंगे और राम की रक्षा के लिए जान देंगे। दलितों का इस्तेमाल मुस्लिमों को कमजोर करने में किया जाएगा। जब तक मुस्लिम टूट नहीं जाते, ख़त्म नहीं हो जाते,वोट बैंक बिखर नहीं जाता, दलित काम के रहेंगे।
मुस्लिमों को कमजोर करने के बाद अगले नंबर दलितों और आदिवासीयों का आएगा। दलितों को बहुत ही चालाकी से कमजोर किया जायेगा। इसके लिए OBC का सहारा लिया जाएगा और दलितों पर जुल्म होंगे ताकि वे अपने अधिकार भूलें।
दलितों और आदिवासीयों को कमजोर करने के लिए कई स्तर पर काम होगा। आरक्षण में बदलाव किये जायेंगे और प्रयास किया जाएगा कि 15-20 साल में इसे बिलकुल कमजोर कर दिया जाये। शिक्षा को आदिवासीयों और दलितों की पहुँच से दूर करने की कार्यवाही शुरू होगी और इस बात के पूरे इंतजाम किये जायेंगे की दलितों ,आदिवासीयों को कभी भी सर्वोच्च पदों पर ना पहुँचने दिए जाये।
बस ज्यादा कुछ नहीं होगा इतना ही होगा की दलित और आदिवासी फिर से गुलाम जैसे हो जाएंगे। नौकरियां कम हो जाएंगी और बेरोजगारी बढ़ जायेगी। इससे गरीबी बढ़ेगी और दलित ,आदिवासी ना चाहते हुए भी गुलामी करने को मजबूर हो जाएंगे।

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