STET अभियार्थी के 5 सवाल सरकार से

सरकार की शिक्षा पर बुरी नीतियों के कारण अब छात्र ही ही विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं छात्र कंपेन चला रहे हैं स्टेट का रिजल्ट नहीं टूटने और छात्र ही हूं बिहार के तमाम सुविधा और शिक्षा पर खर्च होने वाले तमाम सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहे हैं कि बिहार सरकार बिहार सरकार ने पिछले 15 साल में किस तरह लोगों को बेवकूफ बनाया है और किस तरह शिक्षण संस्थाओं को बर्बाद किया है आखिर क्या वजह है कि बिहार के हाई स्कूल में एक भी शिक्षक नहीं है और फिर भी स्टूडेंट 10वीं पास कर जाते किस तरह की पढ़ाई होती है क्या व्यवस्था रहता है पढ़ लेते हैं मैं ही पास तो नहीं किया जा रहा है
Anisha walon ko lekar state abhyarthiyon ne lagatar Sarkar se sawal kar rahi hai logon se pooch rahi hai ki aakhir Bihar mein shikshakon ki yah buri halat aur syster ko shiksha vyavastha kharab kyon

STET परीक्षा पर रोक लगवाने हेतु हाईकोर्ट में याचिका दायर करके निम्नलिखित बिन्दुओं पर आपत्ति उठाई जा सकती है….

1.हाईकोर्ट का आदेश दिया था कि परीक्षा का सिलेबस जारी करने के बाद ही परीक्षा हो।

2. विज्ञप्ति में परीक्षा ” आॅनलाइन ” लेने का उल्लेख नहीं है।परीक्षा फार्म भरने के बाद यदि विज्ञप्ति में परिवर्तन करना है,तो फार्म भरने के लिए कुछ समय फिर से देना होगा।वरना हाईकोर्ट परीक्षा को रद्द कर सकता है।

3.STET को रद्द करने को लेकर मामला हाईकोर्ट में है,वैसी स्थिति में सरकार का परीक्षा का विज्ञापन निकालना गैरकानूनी है।

4. बिहार शिक्षक नियोजन 2012 की नियमावली में ” पात्रता परीक्षा” का उल्लेख है, जबकि इस बार की परीक्षा ” पात्रता परीक्षा ” न होकर नियुक्ति परीक्षा है। बिना 2012 की नियमावली में संशोधन किए ” नियुक्ति परीक्षा ” करवाना गैरकानूनी है।

5. STET की परीक्षा में बिहार के अलावा अन्य राज्यों के अभ्यर्थी भी शामिल हैं। सार्वजनिक परिवहन के साधनों का परिचालन कोरोना अवधि में सरकार के द्वारा स्थगित कर दिया गया है। वैसे में ” ऑनलाइन परीक्षा केंद्र ” पर पहुंचना संभव नहीं है।

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