आज ही के दिन हुआ था अटल बिहारी बाजपेई जी का निधन

अटल बिहारी वाजपई

आज ही के दिन पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की दूसरी पुण्यतिथि है। 2018 को वो साल था और 16 अगस्त का दिन था जब देश के सबसे प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थान एम्स से खबर आई कि अटल बिहारी वाजपेयी नहीं रहे। उनके निधन राजनीति में एक युग का अंत हो गया। वाजपेयी की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वो सभी राजनीतिक दलों में स्वीकार्य थे। ऐसा नहीं था कि उनकी राजनीतिक प्रतिद्वंदिता नहीं थी। लेकिन उन्होंने विचार आधारित राजनीति पर बल दिया और उसका असर दिखाई भी देता था।

राजनीति में मर्यादा और एक दूसरे के सम्मान के पसदार

अटल बिहारी वाजपेयी जब मोरारजी देसाई की सरकार में विदेश मंत्री थे तो एक वाक्या का जिक्र करते हैं जिसमें उन्होंने बताया था कि किस तरह से साउथ ब्लॉक के गलियारे से जब वो गुजर रहे थे तो पंडित जवाहर लाल नेहरू की तस्वीर गायब थी। उन्होंने अधिकारी से सिर्फ सवाल किया और दूसरे दिन वो तस्वीर दीवाल पर टंगी नजर आई। राजनीति के जानकार कहते हैं कि उनकी यही खासियत विरोधी दलों में उन्हें स्वीकार्य बनाती थी। वो कहा करते थे कि जनमुद्दों पर विरोध का मतलब यह नहीं है कि राजनीतिक विचार चेतना को तिलांजलि दे दी जाए। राजनीतिक दलों को विरोध के बीच एक ऐसी संस्कृति का विकास करना चाहिए जो आने वाली पीढ़ी के लिए आदर्श बन सके।

अटल बिहारी जी ने गोलवलकर सावरकर कि जनसंघ पार्टी के खत्म होने के बाद हिंदुत्व और धार्मिक राजनीतिक को पूर्ण बल दिया इसके तहत आज की स्थिति की बुनियाद पड़ी जिसमें धार्मिक उन्माद भेदभाव पूर्ण राजनितिक आज के समाज में दिख रहा है

अटल जी कई मामलों  में सादा नजर आते हैं लेकिन उन की ट्रेनिंग ही ऐसी थी कि लोग इस रास्ते में चल पड़े।

इन तमाम खामियों खूबियों के बावजूद अटल जी उच्च जाति राजनेताओं में और उच्च जाति के समाज में एक बहुत बेहतरीन नेता माने जाते हैं क्योंकि इनके हर काम में सवर्ण हित जाहिर नजर आता है।

 

 

 

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